सात साल। इतने समय बाद Call of Duty ने वह गेम रिलीज़ किया जिसे कई खिलाड़ी आज भी सीरीज़ का सबसे बेहतरीन गेम मानते हैं। और फिर भी, अभी लोग उसी गेम पर वापस जा रहे हैं।
यह वापसी सिर्फ़ नॉस्टेल्जिया (nostalgia) की वजह से नहीं है, हालाँकि नॉस्टेल्जिया (nostalgia) का एक हिस्सा ज़रूर है। जो खिलाड़ी इस टाइटल पर वापस आ रहे हैं, वे पा रहे हैं कि इसके कोर मल्टीप्लेयर मैकेनिक्स (multiplayer mechanics) आज भी वैसे ही दमदार हैं जैसा कि हाल के रिलीज़ में नहीं रहा। सिर्फ़ वेपन बैलेंस (weapon balance) ही काफी है: कई वेपन क्लासेस (weapon classes) में अच्छे विकल्प, कोई एक डोमिनेंट मेटा (meta) नहीं जो सबको एक ही लोडआउट (loadout) पर मजबूर करे, और गनप्ले (gunplay) जो इस हफ़्ते के सीज़नल बैटल पास (seasonal battle pass) में जो बिक रहा है, उससे ज़्यादा स्किल (skill) को रिवॉर्ड (reward) करता है।
जब चीज़ें कॉम्प्लिकेटेड (complicated) नहीं हुई थीं, तब सीरीज़ कैसी दिखती थी
2010 के दशक के ज़्यादातर समय में, Activision ने Call of Duty को सालाना रिलीज़ साइकिल (annual release cycle) पर चलाया, ताकि पाइपलाइन (pipeline) चलती रहे। इस मॉडल की समस्या, जिसे Activision ने बाद में स्वीकार किया, यह थी कि इससे ऐसे गेम्स रिलीज़ होने लगे जो जल्दबाज़ी में बने, रीसायकल (recycled) किए हुए या ट्रेंड्स (trends) को फॉलो करते हुए लगते थे, न कि उन्हें सेट करते हुए। कंपनी ने आखिरकार एक बदलाव का संकेत दिया, यह घोषणा करते हुए कि वे अब मॉडर्न वॉरफेयर (Modern Warfare) या ब्लैक ऑप्स (Black Ops) के बैक-टू-बैक (back-to-back) रिलीज़ नहीं करेंगे ताकि हर इंस्टॉलमेंट (installment) को ज़्यादा समय मिल सके।
यह घोषणा अब अलग तरह से पढ़ी जाती है, जब खिलाड़ी सक्रिय रूप से एक पुराने टाइटल पर वापस जा रहे हैं और उसे बाद के गेम्स से ज़्यादा संतोषजनक पा रहे हैं।
मल्टीप्लेयर (multiplayer) अभी भी काम करता है, और यही तो बात है
बात यह है कि एक अच्छी तरह से डिज़ाइन किए गए मल्टीप्लेयर (multiplayer) मोड के साथ: यह ग्राफिक्स (graphics) की तरह बूढ़ा नहीं होता। साफ़ साइटलाइन्स (sightlines) वाले मैप्स (maps), कंसिस्टेंट TTK (time-to-kill), और एक प्रोग्रेशन सिस्टम (progression system) जो माइक्रोट्रांज़ैक्शन्स (microtransactions) के पीछे कोर फंक्शनैलिटी (core functionality) को लॉक (gate) नहीं करता, ये सब चीज़ें बहुत अच्छी तरह से एज (age) करती हैं। जिस एंट्री (entry) पर खिलाड़ी वापस जा रहे हैं, उसमें ये तीनों चीज़ें थीं।
इसके आस-पास का कम्युनिटी (community) भी मददगार रहा है। एक समर्पित प्लेयर बेस (player base) ने लॉबीज़ (lobbies) को तब भी भरा रखा जब एल्गोरिथम (algorithm) ने इसे प्रमोट करना बंद कर दिया था, जो कि एक ऐसे फ्रैंचाइज़ी (franchise) के लिए सचमुच दुर्लभ है जो आमतौर पर हर नए रिलीज़ के साथ अपने पिछले गेम्स को ही ख़त्म कर देता है।
खतरा
मौजूदा स्टैंडर्ड्स (standards) के हिसाब से ग्राफिक्स (graphics) पुराने हैं, और जो भी हाल के रिलीज़ की विज़ुअल फिडेलिटी (visual fidelity) की उम्मीद कर रहा है, उसे तुरंत फ़र्क नज़र आएगा। यही यहाँ एक ईमानदार चेतावनी है।
नॉस्टेल्जिया (nostalgia) की लहर असल में हमें क्या बताती है
जब खिलाड़ी सात साल पुराने गेम पर वापस जाते हैं और उसे मौजूदा गेम से बेहतर कहते हैं, तो यह सिर्फ़ भावना नहीं है। यह फ्रैंचाइज़ी (franchise) की दिशा पर एक फैसला है।
हाल के Call of Duty रिलीज़ लाइव-सर्विस मैकेनिक्स (live-service mechanics), सीज़नल कंटेंट ड्रॉप्स (seasonal content drops), और एक Warzone इंटीग्रेशन पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहे हैं जिसने बेस मल्टीप्लेयर (base multiplayer) के अनुभव को बदल दिया है। कुछ खिलाड़ी लगातार कंटेंट (content) की सराहना करते हैं। दूसरे महसूस करते हैं कि इसने उस चीज़ को पतला कर दिया है जिसने सीरीज़ को पहली बार काम करने लायक बनाया था: टाइट मैप्स (tight maps), प्रेडिक्टेबल गनफाइट्स (predictable gunfights), और एक कैम्पेन (campaign) जो ख़त्म करने लायक था।
जिस टाइटल पर खिलाड़ी वापस जा रहे हैं, उसमें ये सब था। क्या सीरीज़ Microsoft के Activision Blizzard के स्वामित्व में उस संतुलन को वापस पा सकती है, यह वह असली सवाल है जो अभी फ्रैंचाइज़ी (franchise) पर लटका हुआ है।
जो कोई भी यह जानने को उत्सुक है कि फ्रैंचाइज़ी (franchise) आज कहाँ खड़ी है बनाम कहाँ थी, नवीनतम गेमिंग न्यूज़ (gaming news) और रिव्युज़ (reviews) सीरीज़ में पूरी तस्वीर को कवर करते हैं। ज़्यादा देखने के लिए ज़रूर चेक करें:







